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अनंत कोटी ब्रम्हांडनायक राजाधिराज योगीराज परं ब्रम्हं श्री सच्चिदानंद सदगुरु श्री साईनाथ महाराज की जय



Through the website www.saijagat.com, we will endeavor to provide every possible information of the MorningVision to all the devotees. Although Shreesaibaba ji has many temples throughout India, but his main temple is a famous town in Shirdi district of Maharastra, where SAI Baba ji's world famous temple is located. Ramnavami, Guru purnima and Vijaydashmi is the main festivals Shree Sai Baba ji.



साईं बाबा चालीसा

पहले साईं के चरणों में, अपना शीश नमाऊं मैं ।

कैसे शिर्डी साईं आए, सारा हाल सुनाऊं मैं ॥1॥

शिर्डी साईं बाबा चालीसा

कौन हैं माता, पिता कौन हैं, यह न किसी ने भी जाना ।

कहां जनम साईं ने धारा, प्रश्न पहेली रहा बना ॥

कोई कहे अयोध्या के ये, रामचन्द्र भगवान हैं ।

कोई कहता साईंबाबा, पवन-पुत्र हनुमान हैं ॥

कोई कहता मंगल मूर्ति, श्री गजानन हैं साईं ।

कोई कहता गोकुल-मोहन, देवकी नन्दन हैं साईं ॥

शंकर समझ भक्त कई तो, बाबा को भजते रहते ।

कोई कह अवतार दत्त का, पूजा साईं की करते ॥

कुछ भी मानो उनको तुम, पर साईं हैं सच्चे भगवान ।

बड़े दयालु, दीनबन्धु, कितनों को दिया है जीवन दान ॥

कई वर्ष पहले की घटना, तुम्हें सुनाऊंगा मैं बात ।

किसी भाग्यशाली की, शिर्डी में आई थी बारात ॥

आया साथ उसी के था, बालक एक बहुत सुन्दर ।

आया, आकर वहीं बस गया, पावन शिर्डी किया नगर ॥

कई दिनों तक रहा भटकता, भिक्षा मांगी उसने दर-दर ।

और दिखाई ऐसी लीला, जग में जो हो गई अमर ॥

जैसे-जैसे उमर बढ़ी, वैसे ही बढ़ती गई शान ।

घर-घर होने लगा नगर में, साईं बाबा का गुणगान ॥

दिग्-दिगन्त में लगा गूंजने, फिर तो साईंजी का नाम ।

दीन-दुखी की रक्षा करना, यही रहा बाबा का काम ॥

बाबा के चरणों में जाकर, जो कहता मैं हूं निर्धन ।

दया उसी पर होती उनकी, खुल जाते दु:ख के बन्धन ॥

कभी किसी ने मांगी भिक्षा, दो बाबा मुझको सन्तान ।

शिर्डी साईं बाबा चालीसा एवं अस्तु तब कहकर साईं, देते थे उसको वरदान ॥

स्वयं दु:खी बाबा हो जाते, दीन-दुखी जन का लख हाल ।

अन्त: करण श्री साईं का, सागर जैसा रहा विशाल ॥

भक्त एक मद्रासी आया, घर का बहुत बड़ा धनवान ।

माल खजाना बेहद उसका, केवल नहीं रही सन्तान ॥

लगा मनाने साईं नाथ को, बाबा मुझ पर दया करो ।

झंझा से झंकृत नैया को, तुम ही मेरी पार करो ॥

कुलदीपक के अभाव में, व्यर्थ है दौलत की माया ।

आज भिखारी बन कर बाबा, शरण तुम्हारी मैं आया ॥

दे दो मुझको पुत्र दान, मैं ॠणी रहूंगा जीवन भर ।

और किसी की आस न मुझको, सिर्फ़ भरोसा है तुम पर ॥

अनुनय-विनय बहुत की उसने, चरणों में धर के शीश ।

तब प्रसन्न होकर बाबा ने, दिया भक्त को यह आशीष ॥

`अल्लाह भला करेगा तेरा`, पुत्र जन्म हो तेरे घर ।

कृपा होगी तुम पर उसकी, और तेरे उस बालक पर ॥

अब तक नही किसी ने पाया, साईं की कृपा का पार ।

पुत्र रत्न दे मद्रासी को, धन्य किया उसका संसार ॥

शिर्डी साईं बाबा चालीसा तन-मन से जो भजे उसी का, जग में होता है उद्धार ।

सांच को आंच नहीं है कोई, सदा झूठ की होती हार ॥

मैं हूं सदा सहारे उसके, सदा रहूंगा उसका दास ।

साईं जैसा प्रभु मिला है, इतनी ही कम है क्या आस ॥

मेरा भी दिन था इक ऐसा, मिलती नहीं मुझे थी रोटी ।

तन पर कपड़ा दूर रहा था, शेष रही नन्हीं सी लंगोटी ॥

सरिता सन्मुख होने पर भी मैं प्यासा का प्यासा था ।

दुर्दिन मेरा मेरे ऊपर, दावाग्नि बरसाता था ॥

धरती के अतिरिक्त जगत में, मेरा कुछ अवलम्ब न था ।

बना भिखारी मैं दुनिया में, दर-दर ठोकर खाता था ॥

ऐसे में इक मित्र मिला जो, परम भक्त साईं का था ।

जंजालों से मुक्त मगर इस, जगती में वह मुझ-सा था ॥

बाबा के दर्शन की खातिर, मिल दोनों ने किया विचार ।

साईं जैसे दया-मूर्ति के, दर्शन को हो गए तैयार ॥

शिर्डी साईं बाबा चालीसा पावन शिर्डी नगरी में जाकर, देखी मतवाली मूर्ति ।

धन्य जन्म हो गया कि हमने, जब देखी साईं की सूरति ॥

जबसे किए हैं दर्शन हमने, दु:ख सारा काफूर हो गया ।

संकट सारे मिटे और, विपदाओं का अन्त हो गया ॥

मान और सम्मान मिला, भिक्षा में हमको बाबा से ।

प्रतिबिम्बित हो उठे जगत में, हम साईं की आभा से ॥

बाबा ने सम्मान दिया है, मान दिया इस जीवन में ।

इसका ही सम्बल ले मैं, हंसता जाऊंगा जीवन में ॥

साईं की लीला का मेरे, मन पर ऐसा असर हुआ ।

लगता जगती के कण-कण में, जैसे हो वह भरा हुआ ॥